Transgender जिन्हें की simple language में किन्नर या 'गे' बोला करते है और उन्हें समाज मे कोई जगह नही दी जाती है । समाज से अलग मानकर उन्हें अपने ही घर समाज से बेदखल कर दिया जाता है पर जब से भारत सरकार ने ट्रांसजेंडर्स को आधिकारिक रूप से तीसरे जेंडर में शामिल किया है तब से लोगो का इनके प्रति thinking aur behaviour में बदलाब आये है । आम तौर पर यह लोग कभी स्टेशन ट्रेन या फिर मार्किट में भीड़ भाड़ वाली जगहों पर लोगों से पैसे मांगते हुए दिख जाते है अमूमन ट्रेनों में तो इनसे मुलाकात आमलोगों को हो ही जाती होंगी । देश में हुई गणना के अनुसार इनकी संख्या का आंकड़ा राज्य सरकार के पास 5 lakh है परंतु real में देखा जाए तो इनकी संख्या आकड़ो से कही ज्यादा है । तीसरी जेंडर के रूप मे आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिए जाने के बाद उनकी उम्मीदे सरकार से बढ़ गयी है और उन्हें आशा है कि आने वाले वक्त में उनके उत्थान के लिए सरकार अलग अलग कार्यक्रम चलाएगी । मोदी सरकार की तरफ से हाल में ही ट्रांसजेंडर को भी सरकारी नौकरी में शामिल करने का प्रस्ताव आया है ।
आज हम आपको एक ऐसे ट्रांसजेंडर की कहानी बताने जा रहे है जिन्हें की समाज ने ठुकरा दिया था पर उनकी दोस्तों की मदद से उनकी जिन्दवी एक बार फिर से जीने लायक बन गयी और वह आज खुशी खुशी अपने boyfriend के साथ अपना life spend कर रही है ।
निहारिका (काल्पनिक नाम ) जो कि एक ट्रांसजेंडर है जिसको जन्म देने के बाद जब परिवार वालो को यह बात पता चली जी वह एक ट्रांसजेंडर है तो वो शर्म और लिहाज से बचने के लिए उन्होंने उसे घर से बाहर निकाल दिया । अकेली निहारिका को घर से बाहर निकाल देने के बाद उसे कुछ समझ नही आ रहा था कि आखिर वह जाये तो कहाँ जाए उस वक़्त कोई भी उसका सहारा भी नही था । उसने अपनी जिंदगी को खत्म करने के लिए सुसाइड करने की भी कोशिश की पर खुद को यह मंजूर नही था उर वह किसी प्रकार बच गयी और इसके बाद उसकी जिंदगी ने करबट बदल ली जब उसकी मुलाकात एक सोशल एक्टिविस्ट कृष से हुई जिन्होंने इसे प्रोत्साहित किया और उसे नई जिंदगी जीने के लिए मोटीवेट किया । निहारिका को अपनी जिंदगी के कुछ दिन सेक्स वर्कर के रूप में भी spend karne पड़े और उसके बाद जब उसकी life सामान्य हुई तो उसे एक lover भी मिल गया जिसके साथ वह अब अपनी जिंदगी को सामान्य तरीके से आगे बढ़ा रही है ।






























