पीरियड्स महिलाओं में होने वाली यह क्रिया प्रकति का एक देंन है फिर भी न जाने क्यों लोग इसके नाम सुनकर ही घृणा करने लगते है और जिन लड़कियों को पीरियड्स जारी होता उन्हें कुछ समाज के लोग कुछ पाबन्दियाँ भी लगाने से बाज़ नही आते । बदलते वक्त के साथ पौराणिक काल से चली आ रही कथाओं और कर्मो में भी change लाने की atyant जरूरत है क्या आपको पता है कि आज कल भी लोग जिन लड़कियों के पीरियड्स जारी होते उन्हें मंदिरों और पवित्र स्थानों पर जाने से रोक दिया जाता है यह कहकर की अगर वह वहां चली गई तो अशुभ हो आएगा और मंदिरों या पवित्र स्थलों को फिर से शुद्ध करना पड़ेगा ।
Badalte waqt के साथ लोगो के बीच इस प्रथा को लेकर सोच अभी भी नही बदले है और यही कारण है कि लड़कियों को इनकी मार झेलनी पड़ती है वह भी बेवजह सिर्फ परंपरा के नाम पर ।
आज कल समाज के लोग एक तरफ देवी की पूजा करते है और वही दूसरी तरफ पीरियड्स चल रही लड़की को अशुद्ध मानकर उन्हें पूजा करने से रोक दिया जाता है आखिर इनलोगो के दिमाग मे क्या चल रहा होता है क्या पता । 12-15 साल की उम्र से शुरू होने वाले पीरियड्स के चलते पहले से ही लड़कियों को काफी सारी परेशानियों से गुजरना पड़ता है और बढ़ में यह समाज भी उन्हें हीन नज़रों से देखकर उनके शक्ति कॉन्फिडेंस और ऊर्जा को और भी नीचे करने में कोई कसर नही छोड़ता है । आपको यहाँ बता दे कि मासिक धर्म (पीरियड्स) औसतन 4 दिनों का होता है जो कि हर एक महीने में अमूमन एक बार महिलाओं में होता है जिनसे की उन्हें कमजोरी खून की कमी पेट दर्द चिड़चिड़ापन और न जाने कितने और समस्याओं को झेलना पड़ता है ।
